नेपाल में बीते कुछ दिनों में म्यांमार से भागकर आए शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। म्यांमार में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू होने के बाद, कई लोग पहले भारत की ओर भाग रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा खुली होने के कारण, इन शरणार्थियों की बड़ी संख्या नेपाल–भारत सीमा क्षेत्रों में देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में सीमा इलाकों में सैकड़ों नए चेहरे दिखाई दिए हैं, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। वहीं भारत में हाल ही में घर–घर जाकर आधार कार्ड की कड़ी जाँच शुरू होने के बाद, भारत में रह रहे कई लोग भी नेपाल के विभिन्न नाकाओं से भीतर प्रवेश कर रहे हैं। कुछ लोग तो अपनी पहचान संबंधी दबाव के कारण वापस बांग्लादेश की ओर भी लौटते देखे गए हैं।
नेपाल में सरकार आपसी राजनीतिक विवादों में उलझी होने के कारण, इन शरणार्थियों के प्रवेश और आवागमन पर कोई कड़ाई लागू नहीं हो पा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी आधिकारिक रूप से स्थिति पर स्पष्ट बयान नहीं दिया है। इससे स्थानीय सुरक्षा चिंताएँ बढ़ने के साथ-साथ मानवीय संकट गहराने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में नेपाल–भारत सीमा क्षेत्र और अधिक दबाव में आ सकता है।यहाँ तक कि नेपाल में सरकार के आपसी राजनीतिक विवादों के कारण इनके आवागमन पर प्रभावी रोक-टोक भी नहीं हो पा रही है।
पिछले कुछ दिनों से नेपाल की राजधानी की सड़कों पर भी म्यांमार से आए कई शरणार्थी दिखाई दे रहे हैं। ये लोग शहर के खाली स्थानों में अस्थायी टेंट लगाकर रह रहे हैं और छोटा–मोटा काम करके अपना गुज़ारा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें अधिकांश परिवार किसी तरह जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कई युवा मजदूरी, सफाई या अन्य अस्थायी कामों में लगकर रोज़मर्रा का खर्च पूरा कर रहे हैं।
नेपाल सरकार की कमजोरियाँ: अवैध प्रवेश रोकने में नाकामी
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल सरकार के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेद और लगातार बदलती प्राथमिकताओं के कारण सीमा प्रबंधन कमजोर हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, सीमित जनशक्ति तथा उचित तकनीकी निगरानी का अभाव अवैध प्रवेश को रोकने में प्रमुख चुनौतियाँ बन गए हैं।
नेपाल–भारत खुली सीमा होने के बावजूद सरकार द्वारा प्रभावी जाँच, दस्तावेज सत्यापन और प्रवासियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएँ नहीं की गई हैं। परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में लोग बिना किसी नियंत्रण के देश के भीतर प्रवेश कर पा रहे हैं। अधिकारियों ने अभी तक स्थिति पर कोई ठोस योजना या एकीकृत नीति जारी नहीं की है, जिससे सुरक्षा और मानवीय दोनों तरह की चिंताएँ बढ़ रही हैं।
